रजवाणों की भूमि राजस्थान (Rajasthan) केवल अपने इतिहास (History) ही नहीं बल्कि अध्यात्म की भूमि भी रही है। राजस्थान (Rajasthan) के महलों में बने कई मंदिर (Temple) विश्व प्रसिद्ध हैं। वही कुछ मंदिरों (Temples) का इतिहास ही स्वयं में पूज्यनीय रहा है। यहाँ हम आपको ऐसे राजस्थान (Rajasthan) के 10 सबसे बेहतरीन मंदिरों (Temples) के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में जानकर आपको बहुत ही आश्चर्य होगा।


राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिर। Famous Temples Of Rajasthan.

राजस्थान (Rajasthan) के मंदिरों (Temples) का इतिहास से भी सीधा सम्बन्ध रहा है। जहाँ कुछ मंदिर (Temple) लगभग 1000 साल से ज्यादा पुराने हैं तो कुछ मंदिरों (Temples) के इतिहास आस्था से सराबोर हैं। यहाँ हम आपको राजस्थान के 10 मुख्य मंदिरों (Famous Temples) के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इतिहास आपको चकित कर देगा।

करणी माता मंदिर, बीकानेर (Karni mata mandir, Bikaner)-

बीकानेर (Bikaner) से 30 किलोमीटर दूर देशनोक (Deshnoke) में स्थित करणी माता मंदिर (Karni Mata Mandir) को चूहों वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में लगभग 20000 चूहे हैं और यहाँ चूहों को मारना प्रतिबंधित है और अगर गलती से किसी से चूहा मर जाता है तो उसे चांदी का चूहा मंदिर में दान देना पड़ता है। यहाँ देवी के करणी अवतार की पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर में चूहों की संख्या अधिक होने के कारण पैर सरकाकर चलना पड़ता है। करणी माता मंदिर के बारे में कई कहानियां भी प्रचलित हैं।

कैला माता मंदिर, करौली (Kaila Devi Mandir, Karauli)-

देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक कैला देवी का मंदिर (Kaila Devi Mandir) राजस्थान (Rajasthan) के करौली (Karauli) में स्थित है। हालाँकि कैला देवी मंदिर (Kaila Devi Mandir) के बारे भी बहुत सी कहानियाँ प्रचलित हैं जिनमे से सबसे ज्यादा माना जाता है की मंदिर में स्थापित देवी का स्वरुप वह है जिसे भगवान कृष्णा के जन्म के समय जिस कन्या रुपी योगमाया का वध कंस करना चाहता था वही योगमाया कैला देवी के रूप में इस मंदिर में विराजमान हैं। मंदिर का निर्माण सं 1600 में राजा भोमपाल ने कराया था।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, दौसा (Mehndipur Balaji Mandir, Dausa) -

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर (Menhdipur Balaji Mandir) में भगवान हनुमान के स्वरुप, प्रेत सरकार जी, और भैरों बाबा की पूजा-अर्चना की जाती है। राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर के बारे में भी बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं। यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है।

श्री नाथद्वारा मंदिर (Shri Nathdwara, Mandir)-

उदयपुर (Udaipur) से लगभग 48 किलोमीटर दूरी पर स्थित श्री नाथद्वारा नाम से भगवन कृष्ण के श्रीनाथ स्वरुप का यह मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में महाराणा राज सिंह ने कराया था।

सालासर बालाजी मंदिर, सालासर (Salasar Balaji Mandir, Salasar)-

हनुमान जी के स्वरुप बालाजी का यह मंदिर सालासर, राजस्थान (Salasar, Rajasthan) में स्थित है। यह अकेला हनुमान जी का ऐसा मंदिर है जहाँ बालाजी की मूर्ति के दाढ़ी और मूंछ हैं। इस मंदिर का निर्माण मुस्लिम कारीगरों द्वारा किया गया था। एक कथा के अनुसार प्रचलित है की इस मंदिर में स्थापित मूर्ति किसी किसान को हल से खेत जोतने के समय मिली थी जिसको बाद में सालासर भेज कर स्थापित कराया था।

ब्रह्मा जी का मंदिर, पुष्कर (Brhama Mandir, Pushkar)-

राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर जिले (Ajmer) में पुष्कर झील (Pushkar Lake) के किनारे बना ब्रह्मा जी का मंदिर भारत में ब्रह्मा जी का अकेला मंदिर है। कहा जाता कि ब्रह्मा जी ने यहाँ पर तपस्या की थी। संगमरमर से बने इस मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया था। ब्रह्मा जी का अकेला मंदिर होने के कारण यह मंदिर हिन्दू आस्था का प्रतीक बना हुआ है जहाँ हर साल लाखों यात्री आकर दर्शन करते हैं।

तनोट देवी मंदिर, जैसलमेर (Tanot Devi Mandir, Jaisalmer)-

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज देवी का रूप तनोट माता के रूप में राजस्थान के जैसलमेर से 130 किलोमीटर दूर भारत पाकिस्तान बॉर्डर (Indo-Pak Border) पर स्थित है। कहा जाता है कि भारत पाकिस्तान के 1965 के युद्ध में पाकिस्तान ने तनोट देवी मंदिर पर कई गोले दागे गए जो माता के प्रताप से नहीं फूटे और मंदिर जस का तस खड़ा रहा। इस वजह से मंदिर के प्रति सेना में बहुत अधिक आस्था है।

सांवलिया सेठ मंदिर, चित्तौड़गढ़ (Sanvaliya Seth Mandir, Chittorgarh)-

साँवलिया सेठ का मंदिर (Sanvaliya Seth Mandir) वही मंदिर है जहाँ मीराबाई (Meerabai) भगवान कृष्ण की पूजा करती थीं। मंदिर चित्तौडग़ढ़ के किले (Chittorgarh Fort) में स्थित है। मंदिर में स्थापित कृष्ण जी की मूर्ति जैसी २ मूर्तियां और हैं जो खुदाई में निकली थीं जिनमें से एक को खुदाई की जगह पर और दूसरी को खुदाई करने वाले के घर पर स्थापित किया गया था। 

बेणेश्वर धाम, डूंगरपुर (Beneshwar Dham, Dungerpur)-

राजस्थान (Rajasthan) की सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर बसे बेणेश्वर (Beneshwar) में स्थित बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham) भगवान शिव का मंदिर है। इस मंदिर के प्रति आदिवासियों में गहरी आस्था है। पास में ही भगवान विष्णु का मंदिर है जहाँ विष्णु के अवतार माव जी ने तपस्या की थी।

रणकपुर जैन मंदिर, रणकपुर (Ranakpur Jain Mandir, Ranakpur)-

उदयपुर (Udaypur) से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित रणकपुर जैन मंदिर (Ranakpur Jain Mandir) जैन तीर्थांकर ऋषभदेव जी का मंदिर है। 600 साल पुराने चतुर्भुजी रणकपुर मंदिर को बनने में लगभग 50 साल का समय लगा था। भव्यता के मामले में रणकपुर जैन मंदिर सबसे भव्य जैन मंदिर है।


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